पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले से एक न्यायिक पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई प्रारंभ करने का आदेश कोर्ट प्रशासन को दिया है. 22 जुलाई, 2024 को एक न्यायिक अधिकारी, जो पटना की निचली अदालत में बतौर अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में पदस्थापित थे. उन्होंने दीघा थाना में दर्ज हत्या के प्रयास मामले के आरोपी धर्मेंद्र कुमार को गंभीर इंज्यूरी रिपोर्ट होने के बावजूद उसे नियमित जमानत दे दिया था.जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने श्याम सुंदरी देवी की ओर से दायर जमानत रद्द करने हेतु विविध अपराधिक याचिका को मंजूर करते हुए यह फैसला सुनाया. अभियुक्त धर्मेंद्र पर पिस्तौल से गोली मारकर श्याम सुंदरी के पुत्र मुकेश उर्फ गोपी को गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है. इस मामले में दीघा थाना कांड संख्या 340/2024 दर्ज की गई थी.पटना हाईकोर्ट ने ने धर्मेंद्र को निचली अदालत से मिली नियमित जमानत को रद्द करते हुए उसे दो हफ्ते में आत्म समर्पण करने का मोहलत दिया. अन्यथा उसके बाद विधिवत तरीके से उसे गिरफ्तार करने का निर्देश कोर्ट ने पटना पुलिस को दिया.जस्टिस संदीप कुमार ने अपने 43 पन्ने के फैसले में इस बात की हैरानी जताई कि ”जिन तथ्यों के आधार पर निचली अदालत के उक्त न्यायिक अफसर ने धर्मेंद्र को जमानत दी, वे सभी तथ्य पुलिस केस डायरी वो चार्ज शीट में संधारित पीड़ित मुकेश की इंज्यूरी रिपोर्ट के विपरीत है, जिसे पीएमसीएच के चिकित्सकों ने गंभीर प्रकृति का माना है.”

