बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) पेपर लीक मामले में बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. EOU ने एमबीबीएस डॉक्टर डॉ. मनीष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. आर्थिक अपराध थाना में दर्ज मामले की जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर 27 जुलाई 2026 को यह गिरफ्तारी की गई.जांच एजेंसी का दावा है कि ”आरोपी परीक्षा पेपर लीक गिरोह के संपर्क में था और अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की साजिश में शामिल था.” आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार, यह मामला 16 मार्च 2024 को दर्ज आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-06/2024 से संबंधित है. इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, आईटी एक्ट 2000 तथा बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम, 1981 के तहत जांच की जा रही है.गिरफ्तार डॉ. मनीष कुमार जहानाबाद जिले के परसबीघा थाना क्षेत्र के नेहालपुर गांव के रहने वाले हैं. जांच में सामने आया है कि डॉ. मनीष कुमार की पहले से डॉ. शिव के साथ मित्रता थी. डॉ. शिव जांच परीक्षा गिरोह के सरगना संजीव मुखिया का पुत्र है. आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार, इसी नेटवर्क के माध्यम से बीपीएससी TRE-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश रची गई थी.जांच एजेंसी का आरोप है कि योजना के तहत डॉ. मनीष कुमार को प्रत्येक अभ्यर्थी की सेटिंग के बदले 50 हजार रुपये देने का वादा किया गया था. आरोप है कि 15 मार्च 2024 को आयोजित TRE-3 परीक्षा से दो-तीन दिन पहले मनीष ने करीब 30 अभ्यर्थियों को पटना से आरक्षित वाहन के जरिए हजारीबाग स्थित कोहिनूर होटल पहुंचाया. वहां कथित तौर पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पढ़ाया गया, ताकि वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें. अभ्यर्थियों को होटल में छोड़ने के बाद डॉ. मनीष वापस पटना लौट आए थे.

