रुचिका सिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी की. आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. इसका वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस घटना के बाद रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो FIR आर दर्ज की गई. पीएम मोदी ने एक वीडियो शेयर कर रुचिका की इस भाषा पर आपत्ति जताई. दुख जताया. यह भी कहा कि वह रुचिका को माफ करते हैं. अब सवाल उठ रहा है कि रुचिका को सार्वजनिक रूप से माफ किए जाने के बाद उनके खिलाफ दर्ज कानूनी मामला भी स्वतः समाप्त हो जाएगा? इसका सीधा जवाब है- नहीं.भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में किसी पीड़ित या शिकायतकर्ता द्वारा माफी देने भर से हर मामले का अंत नहीं हो जाता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आरोप किन धाराओं में दर्ज किए गए हैं और वे समझौता योग्य हैं या नहीं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गाजियाबाद की रहने वाली स्मृति सिंह ने बुधवार (29 जुलाई) को एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि रुचिका ने पीएम मोदी के ख़िलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई, जानबूझकर नफ़रत फैलाई और सार्वजनिक शांति भंग को करने की कोशिश की.

