पाकिस्तान के गलत कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पाकिस्तान से आजाद होने का आंदोलन तेज हो गई है. ‘फेल्ड मार्शल’ आसिम मुनीर निहत्थे लोगों को डराने के लिए गोलियां चलवा रहे हैं, सेना से नरसंहार करवा रहे हैं. इतने अत्याचार झेलते हुए भी यहां के लोग भारत में लौटने को छटपटा रहे हैं. उन्होंने भारत से बार-बार मदद मांगी है और भारत के पास मदद करने का हक भी है. ये हक आता है उस दस्तावोज से, जो ये साबित करता है कि पीओके भारत का हिस्सा है. इसमें लिखी एक-एक बात को पढ़कर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं चीन को भी मिर्ची लग जाएगी. ये दस्तावोज भारत की सबसे सुरक्षित जगह पर रखा हुआ है.*PoK भारत का है, ये दस्तावोज है सबूत*भारत ने बार-बार दुनिया के सामने ऐलान किया है कि पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. ये कोई राजनीति या जुमलेबाजी नहीं, बल्कि इसके लिए भारत के पास बाकायदा दस्तावोज है. पीओके का इतिहास के उस पन्ने में छिपा है जिसे ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेस’ यानी विलय पत्र कहा जाता है. ये वही ऐतिहासिक और कानूनी दस्तावोज है जो चीख-चीखकर गवाही देता है कि PoK समेत पूरा कश्मीर भारत का है.*कहां रखा है वो ऐतिहासिक कागज जो PoK पर भारत का हक साबित करता है?*अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि जिस कागज के दम पर भारत पूरी दुनिया के सामने PoK पर अपना दावा ठोकता है, आखिर वो असली दस्तावोज आज है कहां? क्या वो सिर्फ किताबों में लिखा एक इतिहास है या आज भी हमारे पास सुरक्षित है? इसका जवाब है कि 26 अक्टूबर 1947 का वो असली विलय पत्र आज भी भारत सरकार के पास पूरी तरह सुरक्षित है.ये दस्तावोज नई दिल्ली में स्थित ‘नेशनल आर्काइव ऑफ इंडिया’ में संभालकर खास तरह के माहौल में रखा गया है. गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड्स के तहत रखे गए इस कागज पर महाराजा हरि सिंह के असली हस्ताक्षर और लॉर्ड माउंटबेटन की मुहर दर्ज है. यही वो लीगल प्रूफ है जिसकी वजह से दुनिया का कोई भी देश भारत के इस दावो को अंतरराष्ट्रीय अदालतों या मंचों पर चुनौती नहीं दे सकता.

