पहले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 और अब बांकीपुर उपचुनाव में करारी हार ने महागठबंधन की एकजुटता की गांठ खोल दी है. प्रशांत किशोर की जीत का साइड इफेक्ट ही कहिये कि कांग्रेस अब न केवल तेजस्वी यादव की लीडरशिप पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है, बल्कि जन सुराज पार्टी को गठबंधन में शामिल करने की वकालत करने लगी है. कभी आरजेडी में रहने वाले पूर्व विधायक और कांग्रेस प्रवक्ता ऋषि मिश्रा कहते हैं कि नेतृत्व करना है तो मिल-बैठकर सहयोगियों से बात करनी होगी.ऋषि मिश्रा ने कहा कि इस चुनाव से एक चीज तो साबित होता है कि जनता भारतीय जनता पार्टी से परेशान है. जनता चाहती है कि सत्ता से भाजपा को हटाए लेकिन जनता हम पर भी विश्वास नहीं करती है. हम लोग का इतना पुराना गठबंधन है, इसके बावजूद लोगों ने हमको भी वोट नहीं किया. यह सिर्फ एक उपचुनाव की बात नहीं है. 2005 से आप देखेंगे लगातार हम लोग नौ चुनाव हार चुके हैं.ऋषि मिश्रा कहते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल एक मजबूत दल है और इंडिया गठबंधन (बिहार में महागठबंधन) एक मजबूत गठबंधन है. हमारा बेस वोट है. लोग कहते हैं वोट बैंक है लेकिन वह बैंक खुल गया है. वोट इधर-उधर जा रहा है. आखिर इसका चिंतन कौन करेगा?वे कहते हैं, ‘2025 विधानसभा चुनाव हुआ. 243 विधानसभा सीट पर 253 लोग खड़े हुए. कम से कम बिहार में जिन लोगों ने गठबंधन का फैसला किया था, जिन लोगों ने सिंबल दिया था, कौन कहां से चुनाव लड़ेगा? उसका फैसला किया था, वह उन लोगों को बुलाएं. 253 उम्मीदवारों को बुलाकर उनसे बात करें कि कहां क्या गलती हुई?’ऋषि मिश्रा ने कहा कि 25-26 सीट पर हम लोग क्यों आ गए, इसका फैसला कौन करेगा? आप लीड कर रहे हैं तो इसका फैसला कौन करेगा? हम लोग सिर्फ हारने के लिए नहीं है. जनता तैयार बैठी है, जनता चाहती है कि भारतीय जनता पार्टी सत्ता से बाहर करें. हम क्यों पीछे हट रहे हैं? वक्त आ गया है कांग्रेस के छाता के नीचे आना पड़ेगा.

